Friday, 8 February 2013

Remembering Jagjit Singh...(जगजीत साब आप हमेशा हमारे दिलों में जिन्दा रहेंगे।)


  क्या खोया क्या पाया जग में
क्या खोया क्या पाया जग में,
मिलते  और बिछड़ते डग में,
मुझे किसी से नहीं शिकायत,
यद्यपि छला गया पग पग में,
एक  दृष्टि बीती पर  डाली,
यादों की पोटली टटोले,
अपने ही मन से कुछ बोले…
अपने ही मन से कुछ बोले…
पृथ्वी लाखों वर्ष पुरानी,
जीवन एक रात कहानी,
पर तन की  अपनी सीमायें,
यद्यपि सौ शर्तों दीवानी,
इतना  काफी है अंतिम,
दस्तक पर खुद ही दरवाज़ा खोले,
अपने ही मन से कुछ बोले…
अपने ही मन से कुछ बोले…
जन्म मरण का अविरत फेरा,
जीवन बंजारों का डेरा,
आज यहाँ कल कहाँ पहुँच है,
कौन जानता  अधिक सवेरा,
अँधियारा आकाश में सिमित,
प्राणों के पंखो को तौले,
अपने ही मन से कुछ बोले…
अपने ही मन से कुछ बोले…
अपने ही मन से कुछ बोले…
कविता संग्रह:-संवेदना
संगीत एवं गायन :- जगजीत सिंह
द्वारा–श्री अटल बिहारी बाजपेयी (Former Prime Minister Of India)

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